आधार कार्ड (Aadhar Card) के डुप्लीकेशन-फ्रॉड से कैसे बचे ? ?

आधार कार्ड (Aadhar Card) के डुप्लीकेशन फ्रॉड से कैसे बचे ? ?

आधार कार्ड (Aadhar Card) यह भारत सरकार (UIDAI) द्वारा लागू की गयी एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्ड है। आज लगभग सभी भारतीय के बैंक खाते आधार से लिंक हो गए है।

तो क्या आपके आधार कार्ड (Aadhar Card) का डुप्लीकेट बनाकर कोई इसका दुरूपयोग कर सकता है ?

शायद इसका जवाब हां है ?

इस तरह आधार कार्ड डुप्लीकेशन से बचने के लिए क्या करे ?

आप आधार कार्ड की PVC निकलवा सकते है। यह इस्तेमाल किये जा रहे नए आधार कार्ड का स्वरुप है।

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नए आधार कार्ड (Aadhar Card) की क्या विशेषतायें है ?

  • नए आधार कार्ड (Aadhar Card) में आपकी डेमोग्राफिक और बायोमेट्रिक जानकारी शामिल है।
  • और आधार PVC कार्ड सुरक्षा के नजरिये से बहुत सारे विकल्प प्रदान करता है।
  • PVC आधार कार्ड में हेलोग्राफ (एक प्रकार का कोड) भी जोड़ा गया है। जिससे आपके कार्ड की नक़ल निकलवाना असंभव है।
  • और इस कार्ड में एक क्यू आर (QR) कोड भी है जिससे आपका कार्ड ऑफलाइन वेरिफाई हो सकता हैं।

आप भी डुप्लीकेट कार्ड से होनेवाली ठगाई से बच सकते है।
आधार कार्ड की PVC कॉपी ऑनलाइन बनवा सकते है वो भी सिर्फ 50 रुपये में। आधार कार्ड ऑनलाइन मंगवाने के लिए आप uidai.gov.in अथवा resident.uidai.gov.in पर विजिट कर सकते है।

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भारत सरकार के विधेयक में आधार (Aadhar Card) से जुड़े गई क़ानूनी कार्यो में कौन कौन से दंड शामिल है ?

विधेयक में संभावित आपराधिक दंड निम्नलिखित हैं

झूठे आधार कार्ड की जानकारी देना एक अपराध है – इससे 3 साल की कैद और 10,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है।

आधार नंबर धारक की जनसांख्यिकीय और बायोमेट्रिक जानकारी को बदलने या बदलने की कोशिश कर के आधार नंबर से पहचान बताना भी अपराध है – इससे 3 साल की कैद और जुर्माना 10,000 रुपये का हो सकता है।

अनधिकृत व्यक्ति को नामांकन और प्रमाणीकरण के दौरान एकत्र की गई जानकारी को जानबूझकर प्रसारित करना एक अपराध है – इससे भी 3 साल की कैद और 10,000 रुपये (किसी एक व्यक्ति पर) 1 लाख रुपये (किसी कंपनी पर) लगाया जा सकता है।

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केंद्रीय पहचान डेटा रिपॉजिटरी (CIDR) के लिए अनधिकृत पहुंच और हैकिंग एक अपराध है – इससे 10 साल की कैद और जुर्माना 1 करोड़ रुपये का लगाया जा सकता है।

केंद्रीय पहचान डेटा रिपॉजिटरी (CIDR) के साथ छेड़छाड़ एक अपराध है – इससे 10 साल तक कारावास और जुर्माना 10,000 रुपये का लगाया जा सकता है।

किसी दूसरे का बायोमेट्रिक प्रदान करना भी अपराध है – इससे 3 साल की कैद और जुर्माना 10,000 रुपये का लगाया जा सकता है।

Source : Aadhar Official Website

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