नवम्बर 26, 2020

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यमराज का भय दूर करे – ऐसे मनाये भाई दूज

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भाईदूज मंत्र - गंगा पूजे यमुना को, यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें, फूले-फलें
BHAIDUJ

भाईदूज का पर्व कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को अपने घर भोजन के लिए बुलाती है और उन्हें प्यार से खाना खिलाती हैं।

रक्षाबंधन की तरह ही भाईदूज भी भाई-बहन के लिए बेहद खास त्यौहार है। भाईदूज पर बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती है और भाई की सुख-समृद्धि व खुशहाली की कामना करती हैं। इस दिन यमुनाजी  में डुबकी लगाने की परंपरा है। (यमुनाजी में डुबकी लगाने का महत्त्व जानने के लिए अंत तक पोस्ट पढ़े।)

भाईदूज के दिन ही भगवान चित्रगुप्त और कलाम-दवात की पूजा भी की जाती है। क्युकी आज ही के दिन समग्र विश्व का लेखाजोखा रखने वाले भगवान श्री चित्रगुप्तजी की जयंती मनाई जाती है। चित्रगुप्त पूजा के दौरान कलम और दवात की पूजा होती है।

चित्रगुप्त जी की पूजा के लिए मंत्र 

मसिभाजनसंयुक्तं ध्यायेत्तं च महाबलम्। 

लेखिनीपट्टिकाहस्तं चित्रगुप्तं नमाम्यहम्।।

भाईदूज पूजन विधि ( Bhai Dooj Puja vidhi )

  • सुबह उठकर स्नान कर पवित्र हो जाएं। 
  • प्रातः कल स्नान करने के बाद बहन-भाई दोनों यम, चित्रगुप्त और यम के दूतों की पूजा करें तथा सबको अर्घ्य दें।
  • इसके बाद बहन अपने भाई को घी और चावल का टीका लगाती हैं। 
  • फिर भाई की हथेली पर सिंदूर, पान, सुपारी और सूखा नारियल यानी गोला भी रखती हैं। 
  • फिर भाई के हाथ पर कलावा बांधा जाता है और उनका मुंह मीठा किया जाता है। 
  • इसके बाद बहन अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती है। भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं।

भाईदूज मंत्र 

गंगा पूजे यमुना को, यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें, फूले-फलें

भैया दूज कथा ( Bhai dooj vrat katha )

भगवान् श्री कृष्णा और उनकी बहन सुभद्रा की कथा 

  • भगवान् श्री कृष्णा नरकासुर का वध कर अपनी बहन सुभद्रा से मिलने जा रहे थे।
  • बहन सुभद्रा ने श्री कृष्ण के सिर पर तिलक लगाया और उनका आदर सत्कार किया।
  • तभी से भाई बहन के इस प्रेम को भाईदूज के दिन बहुत ही हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है। 

श्री यमराजजी और बहन यमुना जी की कथा 

  • यमुनाजी यमराजजी से बड़ा स्नेह करती थी। वह उनसे हमेशा निवेदन करती थी कि यमराज जी अपने इष्ट मित्रों सहित उनके घर आकर भोजन करे। अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालते रहते थे । इसी बिच कार्तिक शुक्ला का दिन आया। यमुनाजी ने इस दिन फिर से यमराजजी को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उन्हें अपने घर आने के लिए वचनबद्ध किया।
  • यमराजजी  ने सोचा कि मैं तो सबके प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी व्यक्ति अपने घर नहीं बुलाना चाहता। मेरी बहन जिस भावना से बुला रही है, उसका पालन करना मेरा धर्म है। बहन के घर आते समय यमराजजी ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराजजी को अपने घर आया देखकर यमुनाजी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने स्नान और पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुनाजी द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराजजी  ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया।
  • यमुनाजी ने कहा कि “हे भ्राता! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया कीजिये। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करें, उस भाई को आपका भय न रहे।”
  • यमराजजी ने तथास्तु कहा और यमुनाजी को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक के लिए प्रस्थान हुए। इसी दिन से इस पर्व की परम्परा बन गई। ऐसी मान्यता है कि जो भाई आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता। इसीलिए भैयादूज को यमराजजी तथा यमुनाजी  का पूजन भी किया जाता है।

भाईदूज के दिन यमुनाजी में नहाने का महत्त्व क्यों है ?

  • भविष्य पुराण के अनुसार  भगवन श्री सूर्यनारायण की पत्नी संज्ञा उनके किरणों का तेज सहन नहीं कर पा रही थी। इसीलिए वह पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव पर तपश्या करने लगी। 
  • तपश्या काल के दौरान संज्ञा छाया के नाम से जाने जानी लगी। और इस बिच भगवन श्री सूर्यनारायण का उनके पुत्र श्री यमदेव के व्यहवार में परिवर्तन आया। पिताश्री के व्यहवार में आये परिवर्तन को देखकर यमदेव ने अपनी एक अलग नगरी बसाई। 
  • इस नगरी का नाम यमलोक पड़ा। यमलोक में यमदेव पापात्माओं को प्रताड़ित करते थे। भाई के इस कार्य को देखकर यमुना जी गोलोक चली गई। 
  • बहुत समय बीत जाने के बाद यमराज जी को यमुना जी की याद आई। 
  • यमराज जी ने अपने दूतो को यमुना जी की खोज का आदेश दिया। 
  • पर यमुना जी की खोज-खबर नहीं निकली। बहुत ही खोज के बाद यमराज जी को यमुना जी के गोलोक में निवास का पता चला। 
  • वे स्वयं अपने दूतो के साथ यमुना जी से मिलने के लिए गए। 
  • भाई को इतने दिनों बाद देख यमुना जी बहुत ही प्रसन्न हुयी। 
  • उन्होंने ने यमराज जी का स्वागत सत्कार किया और स्वादिस्ट व्यंजन खिलाये। 
  • बहन की सेवा भाव देखकर यमराज जी ने यमुना जी से वरदान मांगने के लिए कहा। 
  • यमुना जी ने वर मांगते हुए कहा कि, “आज के दिन जो भी व्यक्ति मेरे जल में स्नान करे उसे आप का भय न हो। “
  • यमराज जी ने तथास्तु कहा और अपने यमदुतो के साथ यमलोक के लिए प्रस्थान हुए। 

नेपाल में भाईटीका ( भाईदूज)

नेपाल में बहन अपने भाई की लम्बी उम्र के लिए भाईदूज के दिन भाईटीका का त्यौहार मानती है। नेपाल में भाईदूज को भाईटीका के रूप में मनाया जाता है। 

भाई दूज को किन किन नाम से मनाया जाया है?

  • भाईदूज
  • भाई टीका
  • भाईफोटा 
  • भाऊबीज
  • यमद्वितीया 
  • भातृद्वितीया 
  • भात्रीद्वितीया 
  • भगिनी हस्थ भोजनमु 

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