दिसम्बर 5, 2020

NewsJunglee

हमेशा सच के लिए तत्पर.

Make In India vs China

2 min read
Loading...

मेक इन इंडिया और चीन एक विश्वस्तरीय विषय बन चूका है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया (Make in India) के स्पष्टीकरण के बाद सोनम वांगचुक ने मेड इन चाइना की मांग का विरोध करने के लिए चीन की सभी चीजो का बहिस्कार करने का कदम उठाया। चीन ने भारत के लोगो मे चीनी वस्तुओ के बहिस्कार की भावना को दबाने की बहुत कोसिस की। बाहर से चीजे निर्यात करने से देश मे बेरोजगारी का प्रमाण बढ़ता है। 

भारत मेक इन इंडिया (Make in India) कदम को लेकर तब जागृत हुआ है जब विश्व मे मशीने इंसानो की जगह ले रही है और चीन अपना व्यापार विश्व के विकाशशील देशो की तरफ अग्रसर कर रहा है। 

The Tortoise And The Hare

कछुआ और खरगोश की दौड़

भारत का मेक इन इंडिया (Make in India) कदम चीन के मेड इन चाइना से लगभग तीन दशक पीछे है। भारत 1947 मे आजाद हुआ था जबकि चीन मे 1949 मे कम्युनिस्ट पार्टी का उदय हुआ था। रास्ट्रनिर्माण का कार्य दोनो ही देशो मे लगभग 1990 मे शुरू हो गया था। 1990 मे भारत चीन से आगे था। आज खरगोश और कछुये की कहानी मे भारत एक कछुआ है और चीन एक ड्रेगन बन गया है। आज चीन की GDP भारत से 4.6 गुना है। 

Why China Is Ahead Of India?

चीन निर्यात क्षेत्र में पूरी दुनिया में अव्वल नंबर पर है और चीन भारत से बहुत आगे है। इसके कुछ कारण इस प्रकार है।

Export Capacity Of India And China

भारत और चीन की निर्यात क्षमता

आज चीन निर्यात में भारत से बहुत आगे है। चीन का इंफ्रास्ट्रकचर भारत से बहुत अच्छा है। भारत को एक राज्य से दूसरे राज्य में माल सामान का शिपमेन्ट में बहुत समय लगता है वही चीन में ऐसा नहीं है। 

Loading...

उदाहरण के रूप में कोलकाता से भारत के किसी प्रदेश में माल सामान का शीपमेन्ट में लगने वाले समय चीन के शेन्ज़ेन से भारत के किसी प्रदेश में लगने वाले समय से ज्यादा है। और चीन में माल सामान के शिपमेंट की प्रक्रिया भी बहुत आसान है।

जहाँ गति और सरल प्रक्रिया हो वहाँ विकास की गति बहुत तेज होती है। भारत के उद्योगपतियों के लिए चीन एक तगड़ा प्रतिद्वंद्वी है क्युकी चीन सभी प्रकार के सामान को बहुत ही कम मूल्य में बेचता है।

Loading...

Development of Skills: India vs China

कौशल का विकास: भारत बनाम चीन

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने लोगो की कुशलता पर ध्यान दिया है वही भारत भले ही अपनी विशाल जनसँख्या के लिए जाना जाता हो लेकिन लोगो की कुशलता पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है।

चीन की उत्पादन क्षमता भारत से 1.6 गुना ज्यादा है। हलाकि यह अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह हुआ की चीन में हर एक व्यक्ति की उत्पादन क्षमता भारत के व्यक्ति से 60% अधिक है।

भारत और चीन का वार्षिक GDP growth (विकाश) इस प्रकार है।

Loading...

Gender Unevenness

लैंगिक असमता

श्रम बल की बात की जाये तो  चीन ने पारंपरिक रूप से लैंगिक न्याय को प्रोत्साहित किया है। जबकि भारत में, केवल 34 % महिलाएं श्रम शक्ति का हिस्सा हैं और चीन में यह अंक 74 %  हैं।

कई अध्ययनों(research) से पता चला है कि उत्पादकता(productivity) उन देशों  में अधिक है जहा श्रम शक्ति(manpower) अधिक है। और महिला और पुरुष श्रम शक्ति का अनुपात लगभग सामान है।

Comparatively Less Wage Rate

कम श्रम वेतन

चीन ने अपने नागरिको को अँधेरे में रखा है और वह कम श्रम मूल्य पर माल सामान का निर्माण करवा रहा है। लेकिन अब चीन में भी श्रम मूल्य बढ़ रहा है। इस कम श्रम मूल्य की वजह से चीन को निर्माण केंद्र बनने में बहुत मदद मिली है।

Important Facts Of Make In India

मेक इन इंडिया के महत्वपूर्ण तथ्य

“मेक इन इंडिया” (Make in India) एक यथार्थवादी परियोजना है जिसका उद्देश्य भारत मे चीज वस्तुओ के निर्माण को 16% से 25% तक बढ़ाना है।

Loading...

‘मेक इन इंडिया’(Make In India) अभियान की शुरुआत से, भारत पहले ही दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप मे अपनी उपस्थिति दर्ज कर चुका है।

Loading...

भारत में अगले 2-3 दशकों के लिए अनुकूल जनसांख्यिकीय लाभांश है और अन्य विकसित देशों की तुलना में लोगो का वेतन कम है।

भारत मे होने वाला व्व्यापार बहुत मजबूत और उत्तरदायी है जो विश्वसनीयता और व्यावसायिकता के साथ काम कर रहा हैं। व्यापारिक घरानों का भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में बड़ा योगदान है।

भारत एक मजबूत उपभोक्ता बाजार है और आने वाले वर्षों में इसका विस्तार होने वाला है।

शीर्ष तकनीकी और इंजीन्यरिंग संस्थानों द्वारा समर्थित मजबूत तकनीकी और इंजीनियरिंग क्षमताएं इस अभियान को बढ़ावा दे रही है।

‘Make in India’ and ‘Make in China’

‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक इन चाइना’

  • चीन विनिर्माण क्षेत्र में भारत से बहुत आगे है लेकिन यह अनुमान लगाया जाता है कि भारत निर्माण क्षेत्र में चीन को सीधी टक्कर दे सकता है।
  • चीन में व्यक्ति की श्रम लागत लगातार बढ़ रही है और इससे चीन में निर्मित वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है।
  • भारत इसका लाभ Make In India (मेक इन इंडिया) के रूप में ले सकता है और भारत में निर्मित वस्तुओं का निर्यात कर सकता है। 
  • चीन में अच्छी विनिर्माण सुविधाओं के बावजूद उसकी निर्मित वस्तुओ की गुणवत्ता बहुत कमजोर है इस कारण निकट भविष्य में ‘दुनिया के सबसे बड़े निर्यात करने वाला देश’ का स्थान खो सकता है।
  • RBI गवर्नर रघुराम राजन ने बयान दिया कि दुनिया चीन के इस द्विमुखी व्यवहार को स्वीकार नहीं करेगी और चीन भारत को एक सफल निर्यातक बनने से नहीं रोक सकता।
  • हालाँकि चीन दुनिया के 12 प्रतिशत माल-सामान का निर्यात करता है, जबकि भारत 2 प्रतिशत से भी कम निर्यात करता है, लेकिन भारत की विशाल श्रम शक्ति और काफी कम मजदूरी के कारण अगले 4 वर्षों में चीन से एक या दो प्रतिशत निर्यात अंक छीन सकता है। ‘मेक इन इंडिया’ (Make In India) अभियान वैश्विक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकता है।
  • 1978 तक चीन की अर्थव्यवस्था भारत से भी कमजोर थी। लेकिन चीन के विश्व बाजार में कदम रखते ही उसकी अर्थव्यवस्था का विकास शुरू हो गया। 
  • भारतीय अर्थव्यवस्था निरंतर विकास के पथ पर है, लेकिन यह तेजी से तब ही विकास कर सकती है जब कच्चे माल का अधिकतम निर्यात और तैयार माल के न्यूनतम निर्यात पर ध्यान दे।
  • भारत निर्यात में वृद्धि करके विश्व का विनिर्माण केंद्र (manufacturing hub) बन सकता है। 
  • “मेक इन इंडिया” (Make In India) विदेशी निवेशकों को भारत में अपनी इकाइयाँ स्थापित करने के लिए आकर्षित करता है, भारत में निर्माण करके पूरी दुनिया में निर्यात के “मेक इन इंडिया” के उद्देश्य से भारत यथार्थवादी होने जा रहा है। लेकिन भारत को चीन की विकास गति से आगे निकलने में काफी समय लगेगा। 

Make In India to Awaken India

मेक इन इंडिया (Make In India) से जागृत भारत

  • भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी बढ़ती अर्थव्यवस्था है। भारत के पास सस्ते वेतन और प्रचुर संसाधन की वजह से विकास के अपार अवसर है। 
  • भारत में निर्मित वस्तु का आयात करने से भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और यह रोज़गार के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। 
  • “मेक इन इंडिया” (Make In India) अभियान एक मजबूत अभियान है। यदि मजबूत और पारदर्शी प्रणाली के साथ सही रास्ते पर जारी रहे तो भारत का विकास निश्चित है।
  • भारत में पिछडा हुआ इंफ्रास्टकचर, सड़के और बिजली की समस्या विदेशी निवेशकों का भारत में निवेश करने पर एक समस्या हैं।
  • भारत को इन सभी समस्याओ पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए। ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) के विजन को पूरा करने के लिए इन क्षेत्रों में निवेश के लिए निवेशको को आमंत्रित किया जा सकता है।
  • ‘मेक इन इंडिया’ (Make In India) अभियान को सफल बनाने के लिए रेड टेपीसम (आधिकारिक नियमों और औपचारिकताओं से जुड़े दृष्टिकोण) और ऑपरेशनल गड़बड़ियों से दूर रहने की आवश्यकता है ।

Where ‘Make In India’ was Launched?

मेक इन इंडिया कहाँ लॉन्च किया गया था?

25 सितंबर 2014 को भारत सरकार द्वारा विदेशी कंपनियों को भारत में उनके उत्पादों के निर्माण और निर्माण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए मेक इन इंडिया (Make In India) का शुभारंभ किया गया था। इस पहल ने रोजगार के नये क्षेत्र और कौशल वृद्धि के लिए 25 आर्थिक क्षेत्रों को लक्षित किया है। और इसका उद्देश्य भारत को एक वैश्विक डिजाइन और विनिर्माण केंद्र में बदलने का है। 

Loading...

The Approach Of Make In India

मेक इन इंडिया का दृष्टिकोण

  • निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाना। 
  • आधुनिक और कुशल बुनियादी ढाँचे को विकसित करना। 
  • विदेशी निवेशको के लिए नए क्षेत्रों को खोलना। 

The Three main Objectives Of Make In India

मेक इन इंडिया के तीन मुख्य उद्देश्य

  • विनिर्माण क्षेत्र की वार्षिक विकास दर को 12-14% बढ़ाना। 
  • 2022 तक निर्माण क्षेत्र मे 100 मिलियन से ज्यादा नौकरियों का सृजन करना। 
  • 2022 तक विनिर्माण क्षेत्र मे जीडीपी का 25% योगदान (बाद में इसे बढ़ाकर कर 2025 कर दिया गया)। 

मेक इन इंडिया (Make In India) के अनुरूप, व्यक्तिगत राज्यों ने भी अपनी स्थानीय पहलें शुरू कीं, जैसे “मेक इन ओडिशा”, “तमिलनाडु ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट”, “वाइब्रेंट गुजरात”, “हैपनिंग हरियाणा” और “मैग्नेटिक महाराष्ट्र”। वित्त वर्ष 2016-17 में भारत को US $ 60 बिलियन FDI प्राप्त हुआ था। 

Loading...

Who Made The Logo Of Make In India?

मेक इन इंडिया का लोगो किसने बनाया?

दिल्ली स्थित मोबाइल कंपनी मे काम करने वाले राणा भौमिक ने भारत के डिजिटल लोगो का डिजाईन किया था। भौमिक ने कलकता से कुछ दूर पर आए बारासत स्कूल से डिजाइनिंग की ट्रेन्निंग ली थी। 

Which are the 25 Sectors of Make In India?

मेक इन इंडिया के 25 सेक्टर कौन-कौन से हैं?

भारत ने मेक इन इंडिया (Make In India) पहल के दौरान कई सेकटर में विकास की योजना बनायीं है और इन योजनाओ के तहत कई भारतीय और विदेशी कंपनियों ने निवेश के वादे किये है।

1.Automobile (ऑटोमोबाइल)

कंपनीनिवेशप्रदेश
जनरल मोटर्सयूएस $ 1 बिलियनमहाराष्ट्र
किआ मोटर्स कॉर्पोरेशन$ 1.1 बिलियनअनंतपुर, आंध्र प्रदेश
बी.के. मोदी ग्रुपमुरादाबाद
SAIC मोटर कॉर्पोरेशन लिमिटेड$ 300 मिलियनहालोल, गुजरात
एलोन मस्क
सीके बिरला ग्रुप और PSA$ 1.03 बिलियनतमिलनाडु

2.Automobile Accessories (ऑटोमोबाइल की वस्तुएँ)

कंपनीनिवेशप्रदेश
हिताचीचेन्नई

3.Biotechnology (जैव प्रौद्योगिकी)

बायोटेक्नोलॉजी के बारे में अभी किसी भी कंपनी ने निवेश किया है ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

4.Chemicals (रसायन)

रसायन के बारे में भी अभी किसी कंपनी ने निवेश किया है ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

Loading...

5.Construction (निर्माण)

कंपनीनिवेशप्रदेश
डालियान वांडा समूह$ 10 बिलियनहरियाणा

6.Defense Industry (Defence Manufacturing In India रक्षा उद्योग)

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने मेक इन इंडिया (Make In India) कार्यक्रम के तहत सुखोई सु -30 एमकेआई (Sukhoi Su-30MKI) लड़ाकू विमान के 332 घटकों की प्रौद्योगिकी (technology) को हस्तांतरित करने के लिए रूस के इर्कुट कॉर्प (Irkut Corp) के साथ बातचीत की है।

लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) ने फरवरी 2016 में भारत में एफ -16 लड़ाकू विमान बनाने की घोषणा की है।

बोइंग (Boeing) ने भारत में अपाचे (Apache) या चिनूक (Chinook) रक्षा हेलीकॉप्टर, के साथ-साथ एफ / ए -18 सुपर हॉर्नेट (F/A-18 Super Hornet) के निर्माण के लिए भारत में कारखाने स्थापित करने की घोषणा की है।

Loading...

भारतीय सेना ने 50,000 करोड़ (US $ 7.0 बिलियन) के गोला-बारूद के उत्पादन की परियोजना बनायीं है।

7.Export Of Defense Resources (रक्षा संसाधनों का निर्यात)

मेक इन इंडिया (Make In India) के तहत भारत कई देशो को रक्षा के लिए मिसाइल, टेंक और हेलीकॉप्टर का निर्यात करने वाला है।

Loading...
निर्यात करने वाला देश आयात करने वाला देश निर्यात हथियार
भारतम्यांमारटी -72 टैंक (tanks)
भारतआर्मीनियाकामोव 226 टी बहु-उपयोगिता (multi-utility) हेलीकॉप्टर
भारतजॉर्डनहलके वजन के हेलीकॉप्टर
भारतUAEहवा से हवा में मारक मिसाइल

8.Electonics System (इलेक्ट्रोनिक्स सिस्टम)

2020 तक इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर की मांग $ 400 बिलियन तक बढ़ने की उम्मीद है। भारत इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण हब बनने की क्षमता रखता है। और सरकार 2020 तक इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के आयात को शुन्य तक ले जाना चाहती है।

विभिन्न कंपनियों ने विनिर्माण शुरू करने के लिए भारत में निवेश का वादा किया है।

कंपनीनिवेशप्रदेश
माइक्रोमैक्सयूएस $ 42 मिलियनराजस्थान, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश
क्वालकॉम
सैमसंगनॉएडा
स्पाइस ग्रुपयूएस $ 70 मिलियनउत्तर प्रदेश
वीवो मोबाइल इंडियाग्रेटर नोएडा
विस्तरोननोएडा
शाओमीआंध्र प्रदेश
HMD ग्लोबलचेन्नई
VVDN टेक्नोलॉजीज
फोक्सकोनयूएस $ 5 बिलियनमहाराष्ट्र
हुआवेईयूएस $ 170बेंगलुरु
लेनोवोचेन्नई

9.Electrical Machinery (विद्युत मशीनरी)

विद्युत मशीनरी के बारे में अभी किसी कंपनी ने निवेश किया है ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

10.Food processing (खाद्य प्रसंस्करण)

भारत व्यंजनों की विभिन्नता वाला देश है। इसका प्रचार प्रसार करके मेक इन इंडिया (Make In India) को बढ़ावा दिया जा सकता है। कुछ फ़ूड प्रोसेसिंग कंपनियों ने निवेश की योजना बनायीं है।

कंपनी निवेश प्रदेश
निस्सिन फूड्स लिमिटेड$ 7.3 मिलियनओडिशा
पोसीडॉन एक्वाटेक$ 14.7 मिलियनओडिशा

11.Exports (निर्यात)

मेक इन इंडिया (Make In India) के तहत भारतीय जैविक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने के लिए कृषि निर्यात की नीति बनाई जाएगी। फ़ार्म-टू-पोर्ट और फ़ार्म-टू-एयरपोर्ट कोल्ड चेन के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा।

Loading...
Loading...

12.Information Technology And Business Process Management (सूचना प्रौद्योगिकी और व्यवसाय प्रक्रिया प्रबंधन)

इस क्षेत्र में अभी किसी कंपनी ने निवेश किया है ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

13.Leather (चमड़ा)

इस क्षेत्र में अभी किसी कंपनी ने निवेश किया है ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

14.Entertainment And Media (मनोरंजन और मीडिया)

इस क्षेत्र में अभी किसी कंपनी ने निवेश किया है ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

15.Fossil Fuel (जीवाश्म ईंधन)

जीवाश्म ईंधन की खुदाई के क्षेत्र में एक कम्पनी ने मेक इन इंडिया (Make In India) के तहत निवेश की योजना बनायीं है।

कंपनी निवेश प्रदेश
NLC India$ 1.1 बिलियनओडिशा

16.Oil And Gas (तेल और गैस)

कंपनी निवेश प्रदेश
अरामको (Aramco)$ 44 बिलियनभारत का पश्चिमी तट

17.Pharmaceuticals (फार्मास्यूटिकल्स)

कंपनी निवेश प्रदेश
एस्ट्राजेनेका PLC$ 90 मिलियन

18.Shipping And Port (शिपिंग और पोर्ट)

भारत ने सभी बंदरगाहों पर शिपिंग की व्यवस्था कर दी है।

Loading...

19.Railways (रेलवे)

कंपनी निवेश प्रदेश
Alstom/GE परिवहन:US $ 5.6 बिलियनमधेपुरा और मरहौरा (बिहार)
हाइपरलूप वनमहाराष्ट्र
ट्रेन18
CRRC$ 69.5 मिलियनहरियाणा

20.Efficient Transport (कुशल परिवहन)

कंपनीनिवेशप्रदेश
CRRC$ 69.5 मिलियनहरियाणा

21.Renewable Energy (पुनःप्राप्य ऊर्जा)

कंपनीनिवेशप्रदेश
अवाडा पावर और रिन्यू पावर $ 1.4 बिलियन और $ 1.1 बिलियन उत्तर प्रदेश
रिन्यू पावर $ 2.17 बिलियन महाराष्ट्र
NLC इंडिया $ 441 मिलियन ओडिशा

22.Roads And Highways (सड़कें और राजमार्ग)

इस क्षेत्र में अभी किसी कंपनी ने निवेश किया है ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

23.Thermal Energy (तापीय ऊर्जा)

मेक इन इंडिया (Make In India) के तहत भारत ने तापीय ऊर्जा के सभी project भारतीय कंपनियों को समर्पित किये है।

Loading...
कंपनीनिवेशप्रदेश
NLC इंडिया$ 2.2 बिलियनओडिशा

24.Textiles And Garments (कपड़ा और वस्त्र)

इस क्षेत्र में अभी किसी कंपनी ने निवेश किया है ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

25.Wellness And Healthcare (वेलनेस एंड हेल्थकेयर)

कंपनीनिवेशप्रदेश
Columbia Asia$ 60 मिलियन
इंडो-यूके इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ$ 231 मिलियनगुवाहाटी
पतंजलि समूह$ 735 मिलियनहरियाणा
पतंजलि आयुर्वेदहरियाणा

What Is The Difference Between Make In India And Made in India?

मेक इन इंडिया और मेड इन इंडिया मे क्या अंतर है?

Invitation For Make In India

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का मेक इन इंडिया (Make In India) पहल यह विदेशी कंपनियों को भारत मे निवेश करने के लिए आमंत्रित करता है। इस पहल से विदेशी वैश्विक निगम मे भारत का वर्चस्व होगा। जो कंपनिया भारत मे निवेश करेगी वह भारत मे नये रोजगार उत्पन्न करेगी। लेकिन यह कंपनिया कर्मचारी को सिर्फ उनका वेतन देगी और अधिकतम मुनाफा कमायेगी।

जबकि मेड इन इंडिया यह उन उत्पादों के बारे मे है जो सम्पूर्णतः भारत मे निर्मित है। यह स्वदेशी या विदेशी दोनो ही कंपनियों पर लागू होता है। शर्त यह है की किया गया उत्पादन संपूर्णतः भारतीय होना चाहिए।

Loading...

यह एक धारणा है की भारत का मेक इन इंडिया (Make In India) भी चीन जितना सफल होगा। लेकिन यह अवधारणा त्रुटिपूर्ण है।

Made In China

मेड इन चाइना (Made In China) के सभी उत्पाद चीनी कारखानों मे बनाये गए है। चीन की सभी कंपनिया चीन मे ही माल समान का निर्माण करती है और विदेशी कंपनियों के साथ कॉंट्रैक्ट लेती है। जैसे की चीन की फॉक्सकॉन कंपनी, मशहूर स्मार्ट फोन निर्माता कंपनी एप्पल के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्यात करती है। इसका मतलब यह है की चीन की फ़ॉक्सकोन कंपनी को हर एक एप्पल के फोन पर लाभ मिलता है। और इसका प्रत्यक्ष लाभ चीन को होता है।

Make In India

मेक इन इंडिया (Make in India) के तहत आने वाली अधिकतर कंपनियां विदेशी है और भारत मे होने वाले उत्पादन से सिर्फ लोगो को रोजगार मिलेगा लेकिन उत्पाद का अधिकतम लाभ विदेशी कंपनियों को मिलेगा।

मेक इन इंडिया (Make In India) के तहत निवेश करनेवाली सभी कंपनियों को सरकार द्वारा सब्सिडी दी जायेगी। इसका मतलब यह हुआ की आम जनता को अधिक टैक्स भरना पड़ेगा। और अधिक टैक्स भरने के बाद भी हमारे रास्ते और यातायात प्रणाली और अन्य सुविधाओं पर विशेष फर्क नही पड़ेगा।

Loading...

मेक इन इंडिया (Make In India) का उद्देश्य भारत मे रोजगार उत्पन्न करना है। लेकिन इससे सरकार को अधिकतम लाभ नही होगा। क्योकि सारा लाभ विदेशी कंपनिया ले जायेगी। सरकार आयकर से लाभ ले सकती है। इतना सब करने के बाद भी हमें हमारी पहचान नही मिलेगी। जैसेकि IBM मे 50% भारतीय काम करते है फिर भी वह अमेरिकन कंपनी कहलाती है।

Loading...

Pros and Cons of ‘Make in India’

‘मेक इन इंडिया’ का सकारत्मक पक्ष

‘मेक इन इंडिया’ पहल में भारत में विनिर्माण पर ध्यान दिया जा रहा है, जो व्यापार क्षेत्र को बढ़ावा देगा, और नए उद्योगों की स्थापना के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को बढ़ावा देगा।
इस योजना की शुरुआत होते है 2015 में भारत ने अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ते हुए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में शीर्ष स्थान प्राप्त किया था।

‘मेक इन इंडिया’ का नकारात्मक पक्ष

भारत की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है। विश्लेषकों का मानना है कि इस पहल का सबसे नकारात्मक प्रभाव भारत के कृषि क्षेत्र पर पड़ेग। इस पहल में भारत के कृषि क्षेत्र को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर दिया गया है।
हालाँकि ‘मेक इन इंडिया’ मुख्य रूप से विनिर्माण उद्योगों पर आधारित है, इसलिये यह भारत में नए कारखानों की स्थापना करवाना चाहता है।लेकिन यह कारखाने बहुत ही बड़े पैमाने पर प्राकृतिक संसाधनों जैसे पानी, भूमि आदि का उपयोग करेंगे।

नोट: ये सभी जानकारी इंटरनेट रिसर्च से जुटाई गई है यदि जानकारी में आप कोई विसंगतता पाते है तो कृपया कमेंट करे।

Source: Wikipedia, DailyO, MBA Universe

Loading...

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *