दिसम्बर 4, 2020

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Layer Of Nanoparticles Can Improve LED Performance And Lifetime

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layer of nanoparticles
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नैनोकणों की परत एलईडी प्रदर्शन और जीवनकाल में सुधार कर सकती है।

एलईडी (LED) डिज़ाइन के लिए नैनोकणों (nanoparticles) की एक परत को जोड़ने से उन्हें समान ऊर्जा के लिए अधिक प्रकाश उत्पन्न करने में मदद मिल सकती है, और उनके जीवनकाल में भी वृद्धि हो सकती है।

इम्पीरियल कॉलेज लंदन और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT Guwahati) गुवाहाटी की एक टीम के अनुसार, जिन्होंने एलईडी (LED) में प्रकाश की मात्रा को बढ़ाने के लिए एक नया तरीका खोजा है। वे पत्रिका Light Science & Applications में अपने नवाचार (innovation) की रिपोर्ट करते हैं।

Light-emitting diode (LED) प्रकाश स्रोतों को अधिक कुशल (more efficient) और लंबे समय तक चलने वाला बनाने का मतलब होगा कि वे कम ऊर्जा का उपयोग करते हैं, अपने बिजली के उपयोग के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हैं।

टीम ने एलईडी (LED) चिप के बीच नैनोपार्टिकल्स (nanoparticles) के दो-आयामी (two-dimensional) (single layer) रखने के प्रभाव को दिखाया, जो कि प्रकाश की सुरक्षा करता है, और पारदर्शी आवरण (transparent casing) जो चिप की सुरक्षा करता है।

हालांकि आवरण (casing) आवश्यक है, यह एलईडी (LED) चिप से उत्सर्जित प्रकाश (emitted light) के अवांछित प्रतिबिंब (unwanted reflections) का कारण बन सकता है, जिसका अर्थ है कि थोड़ा भी प्रकाश बहार नहीं जा सकता।

उन्होंने पाया कि बारीक ट्यून (finely tuned) किए गए नैनोकणों (nanoparticles) की एक परत को जोड़ने से ये प्रतिबिंब कम हो सकते हैं, जिससे 20% तक अधिक प्रकाश उत्सर्जित (emitted) हो सकता है।

प्रतिबिंब भी डिवाइस के अंदर की गर्मी को बढ़ाते हैं, एलईडी (LED) चिप को तेजी से घटाते (degrading) हैं, इसलिए प्रतिबिंबों (reflections) को कम करने से भी गर्मी कम हो सकती है और एलईडी चिप्स (LED chips) का जीवनकाल बढ़ सकता है।

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IIT-G, ICL develop nanoparticle to boost LED performance | Vishvatimes
Image Source: vishvatimes.com

Co-author Dr. Debabrata Sikdar from IIT Guwahati, formerly a European Commission Marie Curie-Sklodowska Fellow at Imperial, commented: “जहां पहले से आवरण (casing) में सुधार का सुझाव दिया गया है।

अधिकांश एलईडी (LED) बड़ी बनाते हैं या निर्माण के लिए अधिक कठिन होते हैं, सुधार के आर्थिक प्रभाव को कम करते है।

“हमें लगता है कि, मौलिक सिद्धांत (fundamental theory) और विस्तृत, संतुलित अनुकूल विश्लेषण (balanced optimization analysis) के आधार पर, थोड़ा विघटन (disruption) या अतिरिक्त थोक (bulk) के साथ मौजूदा निर्माण प्रक्रियाओं (existing manufacturing processes) में पेश किया जा सकता है।”

Co-author Professor Sir John Pendry, from the Department of Physics at Imperial, said: “प्रस्तावित योजना की सादगी (simplicity of the proposed scheme) और इसे रेखांकित करने वाली स्पष्ट भौतिकी को इसे और मजबूती देगी।

उम्मीद है कि ये आसानी से मौजूदा एलईडी निर्माण प्रक्रिया (existing LED manufacturing process) के अनुकूल होनी चाहिए।

“यह स्पष्ट है कि बड़े प्रकाश निष्कर्षण दक्षता (light extraction efficiency) के साथ, एलईडी (LED) अधिक ऊर्जा बचत के साथ-साथ उपकरणों को लम्बा जीवनकाल प्रदान करेगा।

यह निश्चित रूप से बहुमुखी एलईडी-आधारित अनु प्रयोगों (LED-based applications) और उनके बहु-अरब डॉलर के बाजार (multi-billion-dollar market) पर वैश्विक प्रभाव (global impact) पड़ेगा।”

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Co-author Professor Alexei Kornyshev, from the Department of Chemistry at Imperial, commented: “अनुमानित प्रभाव (predicted effect) नैनोकणों सरणियों (nanoparticles arrays) से संबंधित विभिन्न फोटोनिक प्रभावों (various photonic effects) के एक व्यवस्थित सिद्धांत के विकास का एक परिणाम है।

जो पहले रिपोर्ट किए गए स्विचेबल मिरर-विंडो (switchable mirror-windows), ट्यूनेबल-कलर मिरर (tuneable-colour mirrors), और ऑप्टिकल फिल्टर (optical filters) के संदर्भ में प्रयोगात्मक (experimentally) रूप से परीक्षण किया गया है।”

अनुसंधान (research) के लिए अगला चरण एक नैनोकणों की परत (nanoparticles layer) के साथ एक प्रोटोटाइप एलईडी (prototype LED) डिवाइस का निर्माण होगा, सिद्धांत द्वारा भविष्यवाणी की गई सर्वोत्तम कॉन्फ़िगरेशन (best configurations) का परीक्षण करेगा।

जिसमें नैनोकणों(nanoparticles) का आकार (size), आकार (structure), सामग्री और रिक्ति (spacing) शामिल है, और पर्त (layer) चिप से कितनी दूर होनी चाहिए।

लेखकों का मानना ​​है कि इस्तेमाल किए गए सिद्धांत (principles) एलईडी (LED) की प्रकाश निष्कर्षण दक्षता (light extraction efficiency) बढ़ाने के लिए लागू अन्य मौजूदा योजनाओं के साथ-साथ काम कर सकते हैं।

यही योजना अन्य ऑप्टिकल उपकरणों (optical devices) पर भी लागू हो सकती है, जहां इंटरफेसेस के पार (across interfaces) प्रकाश का संचरण (transmission) महत्वपूर्ण है, जैसे कि सौर कोशिकाओं (solar cells) में।

Source: http://dx.doi.org/10.1038/s41377-020-00357-w
Image Source : Imperial College London

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