What If Oxygen Doubled? – क्या हो अगर प्राण वायु दो गुनी हो जाए?

What If Oxygen Doubled? – क्या हो अगर प्राण वायु दो गुनी हो जाए?

क्या आपने कभी सोचा है अगर पृथ्वी पर ऑक्सीजन का प्रमाण दो गुना हो जाए तो क्या होगा?


जब वातावरण मे ऑक्सीजन गैस पहले से ही है तो क्यों दर्दियो को ऑक्सीजन गैस के सिलिंडर दिये जा रहे है?

अगर पृथ्वी पर ऑक्सीजन (Oxygen) का प्रमाण दो गुना हो जाए तो क्या होगा?

आप सब जानते है की हमारे शरीर मे ओक्सीजन प्राणवायु (Oxygen) की सबसे ज्यादा जरूरत है। बिना ओक्सीजन के मनुष्य का जीवन असंभव है।
जब पृथ्वी का निर्माण हुआ तब ऐसा माना जाता है की पृथ्वी पर डायनासौर नाम की प्रजाति का राज था और बहुत बड़े बड़े पेड़ हुआ करते थे।

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हमारे पुराणो मे भी बताया गया है की काल चक्र चार युगो मे विभाजित है।

  • सतयुग
  • त्रेता युग
  • द्वापरयुग
  • कलयुग

आप को जानकर आश्चर्य होगा की सतयुग मे मनुष्य की औसत ऊँचाई 32 फुट थी।त्रेता युग मे मनुष्य की औसत ऊँचाई 21 फुट थी । द्वापर युग मे मनुष्य की औसत ऊँचाई 12 फुट थी। और वर्तमान चल रहे कलयुग मे मनुष्य की औसत ऊँचाई लगभग 6 फुट है।

युगो के अनुसार पृथ्वी पर प्राण वायु ओक्सीजन (Oxygen) का प्रमाण घटता गया इसीलिए मनुष्य की औसत ऊँचाई भी घटती रही है।

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वातावरण में ऑक्सीजन (Oxygen) दुगुनी हो जाती है यानी पृथ्वी पर ऑक्सीजन 42% हो जाती है, तो होने वाले परिवर्तन कुछ इस प्रकार होगें।

एसा होने पर हमें बहुत से फायदे और बहुत से नुकसान हो सकता है।

  • जंगल की आग और विनाशकारी हो जायेगी। इसे रोकना मुश्किल हो जायेगा।
  • माउंट एवरेस्ट पर जाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत नही होगी। आप आसानी से माउंट एवरेस्ट पर जा सकते हैं।
  • घने वातावरण में पक्षी लंबी और ऊंची उड़ान भर सकते हैं।
  • छोटे कीड़े, मकड़ी, कोंकरोच आदि छोटी नलियों से सांस लेते हैं उनकी नली में ज्यादा ऑक्सीजन जाने से उनका आकार बहुत बड़ जायेगा, चीटी का आकार कबूतर के बराबर हो जायेगा।
  • जरा सी घिसाव से आग लग जायेगी या यू कहिये आग लगने को घटना बहुत समान्य हो जायेगा।

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जब वातावरण मे ओक्सीजन गैस पहले से ही है तो क्यों दर्दियो को ओक्सीजन गैस के सिलिंडर (Oxygen Cylinder) दिये जा रहे है?

  • वातावरण मे ओक्सीजन (Oxygen) सिर्फ 21% है जबकि नाईट्रोजन 78% है।
  • इसीलिए जब कोई बीमार होता है तब उसके फेफड़ो को ओक्सीजन प्राण वायु अलग करने मे बहुत ही परेशानी होती है।
  • और मरीज ठीक से सांस भी नही ले पाता और प्राण वायु ना मिलने पर उसकी मृत्यु भी हो सकती है।
  • जब डॉक्टर ओक्सीजन के सिलिंडर (Oxygen Cylinder) इस्तेमाल करते है तब 90% तक प्राण वायु सीधे फेफड़ों तक पहुँचते है और मरीज को सांस लेने मे आसानी होती है।