वेबसीरीज से होंगे गाली गलौज बंद

वेबसीरीज से होंगे गाली गलौज बंद

कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, जिस पर राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर किए गए हैं, नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन, हॉटस्टार आदि जैसे ऑनलाइन प्रदाताओं द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री भी मंत्रालय के अधीन आएगी।

राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षर किए गए अधिसूचना के अनुसार,नेटफ्लिक्स, अमेज़ॅन, हॉटस्टार आदि जैसे ऑनलाइन प्रदाताओं द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री भी मंत्रालय के अधीन आएगी।

OTT पलटफोर्म से सम्बंधित पक्षों की प्रतिक्रिया

“यह कदम हिंसा, भाषा या नग्नता के बारे में नहीं है, वे नियमो को पारित करेंगे और इस क्षेत्र में प्रगति लौएँगे। हम अपनी वेबसीरीज में स्वयं से ही सेंसरिंग किया करते थे। सरकार का यह निर्णय उन कंटेंट के विरोध में है जो सरकार की नीतियों और पॉलिसियों का विरोध करते है। ऐसा प्रतीत होता है कि वास्तव में कुछ भी नहीं बदला है, यह राष्ट्र या लोगों की स्थिति के बारे में फिल्मों या शो के माध्यम से शुरू किए जा सकने वाले किसी भी प्रवचन को बुरी तरह प्रभावित करेगा ” – एक फिल्म निर्माता ।

हम अपने उद्योग के स्व-नियमन प्रयासों को लागू करने के लिए मंत्रालय के साथ काम करने के लिए तत्पर हैं। जिम्मेदार सामग्री निर्माता (content creators) के रूप में, हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यह अधिनियम न केवल जारी की जाने वाली सामग्री की प्रकृति का संज्ञान (cognizance ) ले लेकिन यह भी सुनिश्चित करता है कि हम इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में रचनात्मकता को सुरक्षित रखें। – एमएक्स प्लेयर (MX Player) के सीईओ करण

OTT प्लेटफॉर्म क्या हैं?

OTT (ओवर-द-टॉप प्लेटफ़ॉर्म), ऑडियो और वीडियो होस्टिंग और स्ट्रीमिंग सेवाएं हैं, जो कंटेंट होस्टिंग प्लेटफ़ॉर्म के रूप में शुरू हुई थी, लेकिन इसने जल्द ही खुद को लघु फिल्मों, फीचर फिल्मों, वृत्तचित्रों और वेब-सीरीज़ के निर्माण में बदल लिया।

OTT प्लेटफार्मों को विनियमित करने वाले कानून क्या हैं?

भारत में अब तक, ओटीटी प्लेटफार्मों को विनियमित करने के लिए कोई कानून या नियम नहीं था क्योंकि यह नया मनोरंजन का अपेक्षाकृत माध्यम है।

जैसा की टेलीविजन रेडियो और सिनेमा की फिल्मो पर सरकार का नियंत्रण था की कोई भी दिशा निर्देशों को पालन किये बिना कार्य नहीं कर सकता। इस अधिसूचना से पहले ओटीटी प्लेटफार्मों पर कोई भी अधिनियम लागु नहीं होता था।

भारत में, ऐसे प्लेटफार्मों के विनियमन पर व्यापक रूप से बहस और चर्चा की गई है। इन स्ट्रीमिंग प्लेटफार्मों पर उपलब्ध सामग्री (Content) को विनियमित करने के दबाव के बाद, इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI), OTT प्लेटफार्मों के एक प्रतिनिधि ने इस अधिनियम का प्रस्ताव दिया था।

अब ओटीटी प्लेटफार्मों का क्या होगा?

इन प्लेटफार्मों को स्ट्रीम करने के लिए आवश्यक सामग्री के प्रमाणन (certification) और अनुमोदन (approval) के लिए आवेदन करना होगा।

यह अपने आप में कई संघर्षों को उत्पन्न कर सकता है क्योंकि अधिकांश OTT प्लेटफार्मों में ऐसे सामग्री (Content) है जो भारत में प्रमाणन बोर्डों द्वारा सेंसर की जा सकती है।

Source: RepublicWorld.com , LiveMint, The Indian Express