Vasant Panchmi Wishes – कैसे करे माँ शारदा की पूजा

Vasant Panchmi Wishes – कैसे करे माँ शारदा की पूजा

Vasant Panchmi Wishes : भारत देश में वसंत पंचमी का त्यौहार का अपना अलग ही महत्त्व है। पुरातन काल से ऐसा मन जाता है की आज ही के दिन विद्या ,कला और संगीत के देवी माता सरस्वती का उद्भव हुआ था।

वसंत पंचमी के साथ ही वसंत ऋतु का आगमन भी होता है। इस दिन से मौसम में सुहाना बदलाव आने लगता है। न ज्यादा ठंड होती है और न ही अधिक गर्मी। ये त्योहार हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है।

Budget 2021-2022 : क्या है आम आदमी के लिए विशेष

कैसे मनाये सरस्वती पूजा ?

इस दिन प्रातः स्नानादि के पश्चात सफेद या फिर पीले वस्त्र पहनकर सबसे पहले पूरे विधि-विधान से कलश स्थापित करें। फिर चन्दन , सफेद वस्त्र , फूल , दही-मक्खन , सफ़ेद तिल का लड्डू , अक्षत , घृत , नारियल और इसका जल , श्रीफल , बेर इत्यादि अर्पित करें। मां सरस्वती के साथ ही इस दिन भगवान गणेश, शिवजी, विष्णु भगवान और कामदेव की पूजा करने का भी विधान है।

बैंक निजीकरण पर RBI के साथ काम करेगी सरकार

कब होगा सरस्वती पूजा मुहूर्त ?

  • हिंदू पंचांग के अनुसार वसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त 16 फरवरी 2021, शुक्रवार को सुबह 3 बजकर 36 मिनट से शुरू होगा।
  • ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इससी समय से पंचमी तिथि आरंभ होगी। साथ ही, 17 फरवरी को सुबह 5 बजकर 46 मिनट पर पंचमी तिथि समाप्त हो जाएगी।

Heart attack सुबह के समय बाथरूम में ही क्यों पड़ता है?

क्या है सरस्वती पूजा की पुरातन कथा ?

  • सरस्वती पूजा (Vasant Panchmi Wishes)की प्रचलित पौराणिक कथा के मुताबिक संसार की रचना के समय भगवान विष्णु की आज्ञा पाकर ब्रह्मा जी ने अन्य जीवों समेत मनुष्य की भी रचना की थी।
  • कहते हैं कि ब्रह्मा जी इससे संतुष्ट नहीं थे, उन्हें ऐसा लग रहा था मानो कुछ कमी रह गई है जिससे चारों ओर शांति का वातावरण है। इसके उपरांत ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु से अनुमति लेकर अपने कमंडल से जल का छिड़काव किया।
  • ऐसा करते ही पृथ्वी पर कंपन होने लगी। फिर पेड़ों के बीच से एक देवी प्रकट हुई, उनके एक हाथ में वीणा और दूसरा हाथ वर मुद्रा में था।
  • जबकि बाकी दोनों हाथों में पुस्तक और मोतियों की माला थी।
  • उन्हें देखकर ब्रह्मा जी ने उनसे वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा बजाना शुरू किया, पूरे संसार के सभी प्राणियों में बोलने की क्षमता का विकास हुआ।
  • समुद्र कोलाहल करने लगा, हवा में सरसराहट होने लगी। यह सब देखकर ब्रह्मा जी ने देवी को वाणी की देवी का नाम दिया। इसके बाद से ही सरस्वती को वीणावादिनी, वाग्देवी, बगीश्वरी के अन्य नामों से पूजा जाता है।

News Junglee आप सभी पाठको को (Vasant Panchmi Wishes) सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामना देता है।

Subscribe