अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच जंग-Azerbaijan and Armenia on war

आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच जारी जंग war में तुर्की की उपस्थिति की वजह से बहुत बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है। दोनों देशो के बिच आज से पहले भी युद्ध हो चूका है।

ये देश 20 February 1988 और 12 May 1994 के दिन युद्ध लड़ चुके है। तीन दिन से चल रहे युद्ध मे आर्मेनिया ने दावा किया है कि उसने तुर्की के एक फाइटर जेट को मार गिराया है। 

आर्मेनियाई रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि हमारे F-16 फाइटर जेट (F-16 fighter jet) ने सुखोई SU-25 (Sukhoi SU-25)को मार गिराया है। इस दुर्घटना में पायलट की मौत (Pilot death in accident) हो गई है।

आर्मेनिया के आरोप पर तुर्की का जवाब- Turkey’s response to Armenia’s charge

तुर्की ने आर्मेनिया के इस आरोप को साफ इनकार कर दिया है। तुर्की ने कहा कि आर्मेनिया को सस्ते प्रचार के लिए ऐसे प्रोपेगेंडा का सहारा लेने के बजाय अपने कब्जे वाले क्षेत्रों से हटना चाहिए। 

तुर्की के अजरबैजान के साथ अच्छे संबंध हैं, वहीं रूस के आर्मेनिया के साथ अच्छे संबंध हैं। 

नागोर्नो-काराबाख: युद्ध की वजह – Nagorno-Karabakh: Reason for War

नागोर्नो-काराबाख को लेकर जारी जंग में अबतक 100 से ज्‍यादा लोगों की मौत हो गई है और सैंकड़ों लोग घायल हैं।

युद्ध की प्रबलता बढ़ने के साथ रूस और नाटो देश तुर्की के इसमें कूदने का खतरा बढ़ता जा रहा है। अभी तक आर्मेनिया के 550 से अधिक सैनिक मारे गए हैं।

रूस जहां आर्मीनिया का समर्थन कर रहा है, वहीं अजरबैजान के साथ नाटो देश तुर्की और इजरायल है।

चल रहे हालातो पर नजर रखने के बाद विश्व के जानकारों ने एक बड़े युद्ध की कल्पना की है।

आर्मेनिया और रूस में रक्षा संधि है यदि आर्मेनिया पर कोई देश हमला करता हैं तो रूस आर्मेनिया की तरफ से युद्ध कर सकता है। 

दूसरी तरफ रूस और तुर्की में पहले से ही लीबिया और सीरिया को लेकर तनाव जारी हैं। इस तनाव बावजूद भी दोनों देशों के बीच व्‍यापारिक संबंध बने हुए हैं। 

क्यों अमेरिका तुर्की से नाराज है?

तुर्की ने रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम खरीदकर अमेरिका को नाराज किया था।

तुर्की अपने हमलावर ड्रोन विमान से नागोरनो-काराबाख में आर्मेनियाई टैंकों का नाश कर रहे हैं। 

रूस ये हरकत बिलकुल बर्दाश्त नहीं कर सकता। इसलिए जानकारों का मानना है की रूस भी इस लड़ाई में अपना योगदान दे सकता है।

विश्व के सभी देशो को यह चिंता हो रही है की चल रहे विवाद में तुर्की, रूस और ईरान भी शामिल हो सकते है।

इस इलाक़े से गैस और कच्चे तेल की पाइपलाइनें गुज़रती है इस कारण इस इलाक़े के स्थायित्व पर संकट उत्पन्न हो सकता है।

नागोर्नो-काराबाख विवाद क्या है ?

  • नागोर्नो-काराबाख 4400 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।
  • दोनों ही देश इस प्रदेश पर कब्ज़ा करना चाहते है।
  • लेकिन इस प्रदेश पर आर्मेनिया के जातीय गुटों का कब्‍जा है।
  • सन् 1991 में इस इलाके के लोगों ने खुद को अजरबैजान से स्वतंत्र घोषित कर दिया था।
  • और खुद को आर्मेनिया का हिस्सा घोषित कर दिया था।
  • इस इलाके के लोगो का यह कदम अजरबैजान ने सिरे से खारिज कर दिया था।
  • भारत और पाकिस्तान की तरह ही अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच समय समय पर युद्ध होते रहते है।
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