दिसम्बर 5, 2020

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काश्मीर पर पाकिस्तान ने OIC द्वारा निशाना साधा

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प्रधानमंत्री इमरान खान Imran Khan इस्लामिक देशों की बैठक बुलाने के लिए मजबूर हो गए है,जो कश्मीर Kashmir के मुद्दे पर पाकिस्तान Pakistan का समर्थन देना चाहते है।

What is Organization of Islamic Cooperation (OIC) ?


OIC यह एक अंतराष्ट्रीय संगठन है जो 1969 में बनाया गया था जिसमे 57 देश के लोगो की सदस्य्ता थी, 2015 में 53 देशों के साथ मुस्लिम-सदस्य देशो की जनसँख्या 1.8 बिलियन थी।

अगर संगठन एक साथ मिलकर कदम उठाता है तो पूरी दुनिया में इनके उठाये गए कदम का प्रभाव पड सकता है।

ARY न्यूज़ पर एक टॉकशो (Talkshow) में बोलते हुए, शाह महमूद कुरैशी ने डाउन (Down) के हवाले से कहा था की

“मैं एक बार फिर सम्मानपूर्वक OIC को बताना चाहता हूं कि हमारी उम्मीद विदेश मंत्रियों के बैठक की है। यदि आप बैठक नहीं बुला सकते हैं, तो मैं प्रधानमंत्री इमरान खान Imran Khan के हवाले से उन इस्लामिक देशों की बैठक बुलाने के लिए मजबूर हो जाऊँगा जो कश्मीर के मुद्दे पर हमारे साथ खड़े होने और पीड़ित कश्मीरियों का समर्थन करने के लिए तैयार हैं। “

कुरैशी की टिप्पणी

कुरैशी ने यह टिप्पणी उस दिन की जब पाकिस्तान की संघीय और प्रांतीय सरकारों ने जम्मू-कश्मीर Jammu Kashmir में अनुच्छेद 370 के एक वर्ष पुरे होने के बाद पाकिस्तान में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया।

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पाकिस्तान पिछले साल अगस्त से ही भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव pressure बनाना चाह रहा था, जिसमें उसे थोड़ी सफलता भी मिली।

डाउन (Down) के रिपोर्ट के अनुसार,”पाकिस्तान ने मुस्लिम देशों के 57 सदस्यीय ब्लॉक की विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए जोर दिया है, जो संयुक्त राष्ट्र के बाद दूसरा सबसे बड़ा अंतराष्ट्रीय संगठन है, क्योंकि भारत ने पिछले अगस्त में कश्मीर पर कब्जा कर लिया था।”

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टॉक शो पर एक सवाल के जवाब में, कुरैशी ने इस्लामिक राष्ट्रों की बैठक के मुद्दे पर बताया की कश्मीर मुद्दे पर “पाकिस्तान और इंतजार नहीं कर सकता “।

कुरैशी ने कश्मीर मुद्दे पर OIC के माध्यम से उम्माह (मुसलमानों का समुदाय) को सन्देश भेजने का दावा किया था।

सऊदी अरब, जिसे OIC के सबसे प्रभावशाली सदस्यों में से एक माना जाता है। उसने OIC के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए पाकिस्तान के आह्वान का असमर्थन किया था।

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पिछले साल दिसंबर में इमरान ने कुआलालंपुर में इस्लामिक देशों के तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर महाजाद की बैठक में हिस्सा लिया था।

ईरान, तुर्की और कतर के नेताओं ने भी इस बैठक में भाग लिया था। जिसे सऊदी बहुल OIC के ‘विकल्प’ के रूप में बताया जा रहा है। उस समय, ऐसी ख़बरें थीं कि इमरान सऊदी अरब के दबाव के कारण कुआलालंपुर के बैठक से बाहर हो गए थे।

बुधवार को, कुरैशी ने स्वीकार किया कि इमरान ने सऊदी अरब के अनुरोध पर कुआलालंपुर शिखर सम्मेलन को छोड़ दिया था।

और कहा कि “पाकिस्तानी मुस्लिम कश्मीर के मुद्दे का नेतृत्व करने के लिए रियाद की मांग कर रहे हैं।” कुरैशी ने डाउन (Down) के हवाले से कहा की गल्फ देशो को पाकिस्तान की कश्मीर मुद्दे की संवेदना को समझना चाहिए।

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सुषमा स्वराज का अबू धाबी summit

इस साल जून में OIC के एक सदस्य (contact group) ने कश्मीर मुद्दे पर चर्चा की जिसमे भारत की आलोचना की थी। इस चर्चा में जोर दिया गया था कि “देश के (भारत) आंतरिक मामलों पर कोई सख्त नियंत्रण नहीं है”।

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मार्च 2019 में, कुरैशी ने भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के अबू धाबी के summit में सम्मानित होने के बाद, OIC के विदेश मंत्रियों की बैठक का बहिष्कार किया था।

source: THE WEEK

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