दिसम्बर 5, 2020

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पाकिस्तान – “Civil War” – पाकिस्तान में हुए हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग, पाकिस्तानी राजनीति संकट में

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आधिकारिक अर्धसैनिक (रेंजर्स) बलों द्वारा पाकिस्तान में एक पुलिस प्रमुख के अपहरण का संकेत एक ऐसे देश में उथल-पुथल का संकेत देता है जो पहले से ही प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अधिक विरोध प्रदर्शनों के लिए ललकार रहा है।

लगभग दो साल पहले खान के सत्ता में आने के बाद से यह घटना पाकिस्तान में सबसे खराब स्थिति में है, 11 विपक्षी दलों का एक गठबंधन पाकिस्तान भर मे रेलिया कर रहा हे ।

रेंजर्स के रूप में जाने जाने वाले सैनिकों ने दक्षिणी सिंध प्रांत के पुलिस महानिरीक्षक “मुश्ताक अहमद महार” के घर पर छापा मारा।

रेंजरों की वेबसाइट के अनुसार , रेंजरों का नेतृत्व एक सैन्य अधिकारी द्वारा किया जाता है जो आंतरिक मंत्रालय के अधीन काम करता है।

विपक्षी राजनेता “बिलावल भुट्टो जरदारी” के प्रवक्ता – “मुस्तफा नवाज खोखर”,  ने दूनिया टीवी  से कहा कि रेंजर्स ने “पुलिस प्रमुख” को मजबूर किया की  एक अन्य विपक्षी नेता “सफीदों अवन” को गिरफ्तार करने के आदेश पर हस्ताक्षर करे । 

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जबकि खान समर्थक सेना सरकार ने अभी तक इस मुद्दे को हल नहीं किया है।

सेना प्रमुख “क़मर जावेद बाजवा – Qamar Javed Bajwa” ने जांच के आदेश दिए।

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प्रधान मंत्री का एक भी प्रवक्ता इस विषय पर टिप्पणी करने के लिए तुरंत उपलब्ध नहीं थे ।

साथ ही कराची में रेंजरों के कार्यालय ने ऐसा कोई भी कार्य करने से मना कर दिया।

इस घटना के बाद सिंध पुलिस अध्यक्ष ओर बाकी अधिकारी भी छुट्टी पे चले गए ।

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सिंध पुलिस अध्यक्ष ने ट्विटर पर देर रात ट्वीट करते हुए अन्य अधिकारियों को कहा की ,”सेना और राज्य सरकार द्वारा जांच पूरी होने तक छुट्टी में देरी करे “।

The International Herald द्वारा ट्विटर पर पोस्ट की गई जानकारी के अनुसार, कराची के 10 पुलिस अधिकारियों की पाकिस्तान शहर में हुई झड़पों में मौत हो गई। इसने यह भी दावा किया कि सिंध पुलिस और सेना के बीच संघर्ष के बाद एक ‘गृहयुद्ध’ शुरू हो गया है। रिपोर्ट की तुरंत पुष्टि नहीं की जा सकती है।

खोखर ने कहा कि प्रांत के शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने “उपहास” करने के लिए छुट्टी मांगी है।

पुलिस ने भी कहा की, “हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में सिंध पुलिस के साथ न्याय होगा, ताकि आने वाले समय में पुलिस का मनोबल और प्रशासनिक स्वायत्तता पर लगाम लग सके।”

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जनता भोजन की कमी, बढ़ती  महेंगाई  और मुद्रास्फ़ीति को दूर करने की मांग की कर रही है, और साथ ही  राजनीति में सैन्य हस्तक्षेप को रोक लगाने की मांग की जा रही है।

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1947 के बाद से पाकिस्तानी  सेना ने पाकिस्तान के  लगभग आधे हिस्से पर सीधे शासन किया है। 

“पाकिस्तानी सेना” ने ऐतिहासिक रूप से उनकी विदेशी और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई । 

लेकिन वर्तमान सरकार के तहत अपनी भूमिका का भी काफी विस्तार किया की , पाकिस्तान के संविधान के तहत सेना और न्यायपालिका की सार्वजनिक  रूप से आलोचना नहीं की जा सकती है।

ये कथित अपहरण पुलिश के अवन के गिरफ़्तारी करने से पहेले हुआ ।

“अवन” ये “मरीयम नवाज़ सरीफ़” के पति हे । मरयम नवाज शरीफ, ये तीन बार के प्रमुख नवाज शरीफ की बेटी और राजनीतिक वारिस हैं।

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कराची में राष्ट्र के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की कब्र की यात्रा के दौरान राजनीतिक नारे लगाने के आरोप में घिरे सिवान को सिंध उच्च न्यायालय से जमानत मिली।

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यह पत्रकारों और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद है, जिन पर खान की सरकार द्वारा सेना की आलोचना के लिए देशद्रोह का आरोप लगाया गया है।

sources : hindustantimes.com, india.com

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